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Friday, 5 October 2018

"साहस"

"साहस"

गिर कर, उठता जा रहा था..
बनता नहीं, पर बनाता जा रहा था..
दुनिया ने तड़पाया हर वक्त..
वक्त की सुइयों से चुभोया..

करता क्या न करता..
साहस करता और दिखाता चला जा रहा था..।।
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