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Saturday, 23 February 2019

1971 में डाकू बलवंतसिंह ने फतेह कराया था कराची, बन गए थे सेना के हीरो

वीरता और देशभक्ति की बड़ी मिसाल: डाकू बलवंतसिंह बन गए थे सेना के हीरो, उनके बताए रास्ते से भारत ने किया था कराची फतेह


By Abhishek Pandey Goldy





   


छाछरो की ऐतिहासिक जीत के हीरो थे डाकू बलवंतसिंह बाखासर।

भवानीसिंह राठौड़/बाड़मेर। छाछरो की ऐतिहासिक जीत के हीरो थे डाकू बलवंतसिंह बाखासर। इस डाकू ने 1971 के युद्ध में भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देशभक्ति का परिचय दिया कि सरकार ने उसके खिलाफ सारे पुलिस मामले माफ कर दो हथियारों का लाइसेंस दे दिया और उसके बाद बलवसिंह बाखासर सेना के हीरो बन गए।


भारत-पाक युद्ध 1971 के दौरान बाड़मेर सीमा की कमान ब्रिगेडियर कर्नल भवानीसिंह जयपुर के पास थी। वे यहां गुजरात से सटे बाखासर रण इलाके में पहुुंचे। रण के इस क्षेत्र में रास्ता ढूंढना और आगे बढऩा मुश्किल था।

उस वक्त बाखासर में डाकू बलवंतसिंह बाखासर का रौब था। वे यहां से पाकिस्तान के छाछरो तक आते-जाते रहते थे। उनके खिलाफ पुलिस में कई केस थे। देश की लड़ाई में ब्रिगेडियर भवानीसिंह ने बलवंतसिंह को याद किया। फिर बलवंतसिंह ने देश के लिए हथियार हाथ में थाम लिए और भारतीय सेना के साथ रवाना हो गए। सामने टैंक रेजिमेंट थी।

भवानीसिंह और बलवंतसिंह ने चतुराई बरतते हुए अपनी जीप जोंगा के साइलेंंसर खोल दिए। इनकी आवाज ऐसी हो गई जैसे सामने भी टैंक रेजिमेंट ही हो। इससे पाक सेना ठिठक गई। मौका मिलते ही बलवंतसिंह ने अदम्य साहस दिखा भवानीसिंह के साथ रहते हुए दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए। पाकिस्तान के छाछरो तक सेना पहुंच गई।

पाक सीमा के रास्ता जानते थे
बाखासर क्षेत्र के बलवंतसिंह पाकिस्तान सीमा के 100 किमी के दायरे से अच्छी तरह वाकिफ थे। यहां कर्नल भवानीसिंह ने एक बटालियन व 4 जोंगा जीप उन्हें सौंप दी। फिर बलवंतसिंह बटालियन लेकर पाक के छाछरो तक घुस गए। उनके साथ ही भवानीसिंह ने पाक सेना पर धावा बोल दिया। फिर छाछरो चौकी व 100 गांवों को अपने कब्जे में लिया। और सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध में डटे रहे।

भवानीसिंह को मिला महावीर चक्र, बलवंत बने हीरो
युद्ध समाप्ति बाद भवानीसिंह को महावीर चक्र मिला तो बलवंतसिंह हीरो बन गए। उनके सारे पुलिस केस वापिस ले लिए गए। दो हथियारों का लाइसेंस भी दिया गया। युद्ध समाप्ति के बाद भवानीसिंह की यूनिट ने अपनी ग्लोरी में बलवंतसिंह को सम्मान देते हुए युद्ध हीरो बताया।

फैक्ट फाइल
- 3 दिसंबर से 17 दिसंबर तक चला था युद्ध

- 4000 वर्ग किलोमीटर के करीब कब्जा कर लिया था भारत ने
- 60333 लोगों ने छोड़ा था पाकिस्तान

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